Anuj Singh
Tragedy
तुझसे बेरुखी तो कभी थी ही नहीं,
बस तेरा यूं जाना गवारा ना रहा।।
बारिश का मौसम...
रुखसत
अधूरा सपना।।।
संघर्ष
सतत जीवन
बेरुखी
एहसास
प्यार के रंग ...
मां बाबा
तेरे लंबे बाल और गुलपोशी के चर्चे हर जगह थे खुबसूरती बेहद थी तुझमें पर पहरे हर जगह थे. तेरे लंबे बाल और गुलपोशी के चर्चे हर जगह थे खुबसूरती बेहद थी तुझमें पर पहरे ह...
बस जन्म जहाँ परिचायक हो, फिर चाहे योग्य या नालायक हो। बस जन्म जहाँ परिचायक हो, फिर चाहे योग्य या नालायक हो।
कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था। कुछ टूट रहा था, कुछ छूट रहा था, लेखन से नाता टूट रहा था।
अजी नौकरी का भी अपना मज़ा है। जहां अपनी चलती नही कुछ रज़ा है। अजी नौकरी का भी अपना मज़ा है। जहां अपनी चलती नही कुछ रज़ा है।
संसद में हो या गलियों में, नारी का अपमान गलत है । संसद में हो या गलियों में, नारी का अपमान गलत है ।
अथाह स्वेद बहाती है। अपनी जठराग्नि बुझाती है।। अथाह स्वेद बहाती है। अपनी जठराग्नि बुझाती है।।
अपने घर का हाल देखकर,चुप रहना मत रोना अम्मा । अपने घर का हाल देखकर,चुप रहना मत रोना अम्मा ।
घर घर जाके सबको हम सपना यही दिखाएंगे अच्छे दिन आएँगे, अच्छे दिन आएँगे। घर घर जाके सबको हम सपना यही दिखाएंगे अच्छे दिन आएँगे, अच्छे दिन आएँगे।
दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर। दूर कहीं दिख रहा था एक अस्थि पिंजर, जिस पर रह गया था बस मॉंस चिपक कर।
चीखती नदी मौन प्रार्थना में लीन हो जाती है। चीखती नदी मौन प्रार्थना में लीन हो जाती है।
छाती से चिपकाकर सुधियाँ पीड़ाओं ने लोरी गायी ! छाती से चिपकाकर सुधियाँ पीड़ाओं ने लोरी गायी !
तथा स्क्रीन पर आ गए भगत, सुभाष और अन्य वीर क्रांतिकारी। तथा स्क्रीन पर आ गए भगत, सुभाष और अन्य वीर क्रांतिकारी।
राजनीति के खेल में क्या हार क्या जीत ; ना कोई शत्रु यहां और ना यहां कोई मीत ! राजनीति के खेल में क्या हार क्या जीत ; ना कोई शत्रु यहां और ना यहां कोई मीत !
मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है मेरे हिंदू मुस्लिम बच्चों को आपस में लड़ाया जाता है
कुछ भी करें आज़ाद है अब तो हम, अधिकार ही हैं,फर्ज़ कहाँ मानते हैं। कुछ भी करें आज़ाद है अब तो हम, अधिकार ही हैं,फर्ज़ कहाँ मानते हैं।
इक दुबला पतला सा पेड़ था, चंद टहनियां चंद पत्ते थे। इक दुबला पतला सा पेड़ था, चंद टहनियां चंद पत्ते थे।
कहने लगा, "फर्ज़ अदा करने की सज़ा मिली है एक बाप को।" कहने लगा, "फर्ज़ अदा करने की सज़ा मिली है एक बाप को।"
है कितना क्षण भंगुर यह जीवन, अगले पल का पता नहीं। है कितना क्षण भंगुर यह जीवन, अगले पल का पता नहीं।
औंधी पड़ी हुई धरती पर, निपट अभागिन छाँव। औंधी पड़ी हुई धरती पर, निपट अभागिन छाँव।
धरती ऐसे जल रही, जैसे जले मशाल। धूल-धूल रस्ते हुए, सूखे-सूखे ताल। धरती ऐसे जल रही, जैसे जले मशाल। धूल-धूल रस्ते हुए, सूखे-सूखे ताल।