Anuj Singh
Romance
जन्नत सी महक आती है
तेरे प्यार के रंगों की बारिश में।
खामोशी और इजह...
बारिश का मौसम...
रुखसत
अधूरा सपना।।।
संघर्ष
सतत जीवन
बेरुखी
एहसास
प्यार के रंग ...
अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में। अचानक ही तो मिले थे हम दोनों समय और संस्कारों की यात्रा में।
समझ नहीं पा रही मेरा आँचल छोटा है या तुम्हारे एहसान बड़े क्यूँ समेट नहीं पा रही। समझ नहीं पा रही मेरा आँचल छोटा है या तुम्हारे एहसान बड़े क्यूँ समेट न...
हो जाती है पूर्ण तुम्हीं से, काव्य-कामिनी कञ्चन। हो जाती है पूर्ण तुम्हीं से, काव्य-कामिनी कञ्चन।
ताजग़ी, खुशबू, उफान, गर्माहट और मिठास लिए। ताजग़ी, खुशबू, उफान, गर्माहट और मिठास लिए।
हे सखी, तू प्रेम मूर्ति, बन उनके जीवन की पूर्ति, तू उनकी आलिंगन है, तू ही उनकी साजन भी... हे सखी, तू प्रेम मूर्ति, बन उनके जीवन की पूर्ति, तू उनकी आलिंगन है, तू ही उनकी स...
बेशक खामियाँ बहुत हो मुझमें, पर प्यार तो तुम से करती हूँ। बेशक खामियाँ बहुत हो मुझमें, पर प्यार तो तुम से करती हूँ।
इत्मिनान इतना कि स्वप्न में थी मैं और तुम अभी चालीसवें में हो। इत्मिनान इतना कि स्वप्न में थी मैं और तुम अभी चालीसवें में हो।
तुम सौंप दो अपना तन-मन मुझको मैं ग्रह लूँ तुम्हारा समर्पण। तुम सौंप दो अपना तन-मन मुझको मैं ग्रह लूँ तुम्हारा समर्पण।
उसके बारे क्या कहां जाए, जो दिल के सबसे करीब है...? आप क्या कहते है...? नहीं बताओगे...? तो चलो हम बत... उसके बारे क्या कहां जाए, जो दिल के सबसे करीब है...? आप क्या कहते है...? नहीं बता...
जो जब जब मुझ पर पड़ती है मुझे थोड़ा और तेरा कर देती है। जो जब जब मुझ पर पड़ती है मुझे थोड़ा और तेरा कर देती है।
नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा नफरतों का हो कैसा भी आलम ऋषभ प्रेम नफरत में चाहत को भर जायेगा
कुछ पल के लिए, जब कमर पर ब्रश उसने चलाया होगा। कुछ पल के लिए, जब कमर पर ब्रश उसने चलाया होगा।
रख सकता था तुम्हे और तुम्हारे उस मखमल सम मृदुल एहसास को। रख सकता था तुम्हे और तुम्हारे उस मखमल सम मृदुल एहसास को।
हां ! अकेली नहीं होती हूं मैं जब तुम मेरे पास नहीं होते। हां ! अकेली नहीं होती हूं मैं जब तुम मेरे पास नहीं होते।
मोहलत खुदा से मांग लाता अगर मैं मन पढ़ पाता। मोहलत खुदा से मांग लाता अगर मैं मन पढ़ पाता।
अमलतास सी वफा की छाँव ही छाँव बरसती है। अमलतास सी वफा की छाँव ही छाँव बरसती है।
वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक… वह कहानियाँ कहता था…मैं कहानियाँ सुनती थी… उसे व्हाईट रंग पसंद था और मुझे ब्लैक...
वो आज भी ख्वाबों में आता है!! जगाकर नींद से, यादों के भँवर में फँसा जाता है वो आज भी ख्वाबों में आता है!! जगाकर नींद से, यादों के भँवर में फँसा जाता ह...
तलब चाय की मुझे लगी थी, और रसोई में चाय बनाते तुझे देखा है मैंने। तलब चाय की मुझे लगी थी, और रसोई में चाय बनाते तुझे देखा है मैंने।
चलो हम-तुम फिर बैठ के सुबह की चाय एक साथ पीते हैं। चलो हम-तुम फिर बैठ के सुबह की चाय एक साथ पीते हैं।