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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance Tragedy

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Dhanjibhai gadhiya "murali"

Romance Tragedy

बेचैनी

बेचैनी

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तुझे देखे बिना मुझे, बेचैनी सी लगती है,

ये सूरज की किरनें भी मुझे , तीर जैसी लगती है,

हरपल तुझे पुकारता हूं, ओ मेरी जानेमन,

तेरी याद मुझ को, हमेशा आती रहती है।


तेरे बिना ये पूनम मुझे , अमावस जैसी लगती है,

ये सावन की घटा भी मुझे , विराना जैसी लगती है,

कहां छूप गई है तू, ओ मेरी जानेमन,

तेरे मिलन की तड़प, मुझे दीवाना बनाती है।


तेरी सुंदर सूरत मुझे , सपनों में कायम सताती है,

निंद में से मुझे जगाकर, तेरे पीछे दौड़ाती है,

अब मैं नहीं रह सकता, ओ मेरी जानेमन,

तेरे बिना ये जीवन मेरा, मुझे अधूरा लगता है।


तेरा इन्तज़ार करते करते, आंखें मेरी थक गई है,

तेरे प्यार को पाने की, प्यास मुझे लगी रहती है,

"मुरली" के दिल में बस जा, ओ मेरी जानेमन,

प्यार की प्यास मिटाने के लिये, तेरी मुझे जरूरत है।



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