STORYMIRROR

Rohit Verma

Drama

3  

Rohit Verma

Drama

बढ़ती उम्र

बढ़ती उम्र

1 min
273

"उम्र बढ़ रही है चलो हम भी बदलते हैं"

"बचपन को छोड़ जिम्मेदारी पर खड़े उतरते हैं"

"चलो आज अपना वक्त बदलते हैं"

"उम्र बढ़ रही है चलो हम भी बदलते हैं"

"बचपन में लेते थे सबका साथ

अब खुद अपने कदमों में खड़े उतरते हैं"

"चलो एक मिसाल अपनों के लिए कायम करते है"

"उम्र बढ़ रही है चलो हम भी बदलते हैं"

"हौसला लेकर अपने सपनों को पूरा करते हैं"

"जिसने उंगली पकड़ कर चलना सिखाया आज उन्हीं का सहारा बनते हैं"

"उम्र बढ़ रही है चलो हम भी बदलते हैं"

"इस दुनिया में हम भी थोड़ा रंग लेते हैं"



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama