बचपन
बचपन
पूछा जाए जब भी ये सवाल
जीवन का वापस कौन सा
लाना चाहते हो पड़ाव
हर कोई बचपन में चाहता है लौटना
बन जाना चाहता है फिर से बच्चा
कितना निश्छल कितना सरल
बिना आंडबर के जीता है अपने मन से
न कोई नफरत,न कोई भेद
वो जाने है बस करना प्रेम
यही तो तो है जीने का मकसद
जीवन का सही मायने सिखाए बचपन।
