STORYMIRROR

मिली साहा

Romance

4  

मिली साहा

Romance

बातें ख़्वाबों की

बातें ख़्वाबों की

1 min
368

हकीकत के आईने में ज़िन्दगी खाली हाथ रह गई।

बातें ख़्वाबों की, बस ख़्वाब बनकर ही रह गई।।


समझते रहे जिसे अपना, उसके दिल में नहीं हम।

पल पल उसकी ये बेरुखी, दरार बनकर रह गई।।


वो कहने को बस हमसफ़र, साथ कभी चले कहाँ।

सफ़र में छाँव नहीं, ये ज़िंदगी धूप बनकर रह गई।।


दिल के कोरे काग़ज़ पर लिखने चले जो कहानी।

इस जन्म में बस, दर्द की दास्तां बन कर रह गई।।


वो समझ न सके जज़्बातों को, बहते आँसुओं को।

ये ज़िन्दगी एक ख़ामोश किरदार बनकर रह गई।।


ताउम्र समझाते रहे वफ़ा हम, बस एक उम्मीद में।

पर हमारी मोहब्बत तो बस सजा बनकर रह गई।।


काश! आँखें बंद होने से पहले, वो समझे मोहब्बत।

यही आखिरी ख्वाहिश, ज़िन्दगी बन कर रह गई।।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Romance