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Divyanjli Verma

Abstract

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Divyanjli Verma

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बाल मजदूर

बाल मजदूर

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आज फिर एक बचपन,

जिम्मेदारियो से हार गया।

पढाई की उम्र में,

काम करने की जरुरत क्यों पड़ी होगी ?


क्या जरूरतें शिक्षा से बड़ी होगी ?

सब स्कूल जाते है,

बडा आदमी बनने के सपने लेके।

उसका सपना तो बस,

आज ज्यादा सब्जी बिकने का है।


खेलने की उम्र मे तराजू लेके बैठा है।

"सब्जी ले लो साहब" एक बचपन कहता है।

चला गया अब वो कानून,

बाल मजदूर के नाम पर भाषण दे गया।

सबको शिक्षा देने की बात कहता था जो,


आज वही बचपन,

उसके घर सब्जी दे गया।


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