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Aprajita Deval

Romance Classics

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Aprajita Deval

Romance Classics

अवशेष

अवशेष

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तुम

चले भी जाओगे

तो भी

अनुपस्थित नहीं हो पाओगे।


जैसे

बरसों पहले बुझा हुआ कोई तारा

अब भी

अपनी रोशनी से

आकाश के किसी कोने में दर्ज़ है,


वैसे ही

तुम्हारा होना

मेरे भीतर

घटना नहीं,

एक भूगर्भीय परत है।


समय

बहुत कुछ मिटा देता है,

पर कुछ स्मृतियाँ

मिटती नहीं—

वे मनुष्य के भीतर

उसकी आत्मा का भूगोल बन जाती हैं।


और फिर

कठिन यह नहीं कि

तुम्हें भूल जाऊँ,


कठिन यह है कि

ख़ुद को याद रखूँ

तुम्हारे बिना।


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