चलो अब गांव चलते हैं
चलो अब गांव चलते हैं
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बहुत हुआ पलट कर देखना, चलो अब नजर अंदाज करते हैं।
तन्हाइयों से निकलकर अब महफिल में चलते हैं।।
बहुत हुआ रातों में जगना, चलो अब से सोते हैं।
झूठी मुस्कुराहट छोड़ कर, फिर से हँसते हैं।।
बहुत देख लिए पार्क, चलो अब बाग चलते हैं।
दूर रह लिए चलो अब साथ चलते हैं।।
बहुत देख ली बाहर की दुनिया चलो अब घर को चलते हैं।
देख लिया है शहर को, चलो अब गांव चलते हैं।।
