औरत की महिमा
औरत की महिमा
अगर औरत जात नहीं होगी
कैसे संरचना इस संसार की होगी ?
अगर धरती पर इंसान नहीें होंगे
सोचने पर मजबूर भगवान होंगे।
नहीं होंगे मन्दिर-गुरूद्वारे
कुतुब मीनार और चार मीनारें।
नहीं बजेगी मन्दिर की घण्टियाँ
न होगा शंखनाद
कौन करेगा पूजा-अर्चना
कौन करेगा आह्रवान।
नहीं होगा ज्ञान-विज्ञान
साहित्य और पुराण।
नहीं होगा इतिहास
हास और परिहास।
नहीं होगा खाना-ख़जाना
साजो और सामान।
कितना सुनसान होगा ये जहान
कैसा होगा धरती का कानून
सब पर सवार होगा जुनून।
रेंगेंगे कीडे़-मकोडे़
जीव और जन्तु।
चहुँ ओर जंगल का राज होगा
कितना दयनीय यह संसार होगा।
बहुत सुन्दर वह जहान
औरत जहाँ महान।
इस बिन अधूरे महापुराण
नहीं मिटाना इसका नामोनिशान।
देना है इसे मान-सम्मान
इसी में है सभी का कल्याण ।
