अटूट बंधन
अटूट बंधन
सात वचनों का बंधन ये, जन्मो जन्मो का नाता हैं।
जाना जो विराटता इसकी, आत्मज्ञान पथ पाता हैं।।
संग संग चल जहाँ दो आत्माएं, प्रेम सहकार गाती है।
ईश्वर की दिव्यता फिर, अंतस में प्यार उपजाती हैं।।
त्याग, प्रेम, करुणा के पथ पर, दो योगी चल देते है।
भूल कर "मैं" को, हम बन संग संग बढ़ते चलते हैं।।
प्रेम, सहकार, संस्कार संग, नवपल्लव यहाँ उपजते हैं।
संस्कार की मनोभूमि पर, प्रेम के दीपक जलाते है।।
एक प्यारा आध्यात्मिक मिलन, अनुष्ठान ही विवाह है।
आत्मज्ञान का गहन रहस्य, जहाँ गूंथा और बुना हैं ।।
काश! समझते हम सभी, विवाह के अतुल्य बंधन को।
प्रेम से हर दिल सजते, सजाते हम सब वसुधा को।।
साकार होता वसुधैव कुटुंब, प्रेम का हर नाता बनता।
परिवार की पाठशाला में जो, प्रेम से हर पुष्प सींचता।।
