Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Dr Shikha Tejswi ‘dhwani’

Tragedy


5.0  

Dr Shikha Tejswi ‘dhwani’

Tragedy


अस्पताल की आग

अस्पताल की आग

1 min 181 1 min 181

देखो कैसा है आज, 

इस अस्पताल का दृश्य।

न डॉक्टर है कोई यहाँ, 

न है कोई यहॉं मरीज़।।


नंगे खाट बिछे हुए हैं,

चहुँओर इस कमरें में।

कोई कोई खाट पर हैं,

झुलसे शव शिशु के।।


यह कैसा मौत सा,

सन्नाटा है फैला हुआ।

मानो अभी-अभी

ताण्डव दिखलाकर,

मौत हो वापस लौटा हुआ।।


सोंचो, यह मंज़र ऐसा है तो,

वो मंज़र फिर कैसा होगा?

चीख़, पुकार हड़कम्प मची,

फिर आग में सबको झोंका होगा।।



Rate this content
Log in

More hindi poem from Dr Shikha Tejswi ‘dhwani’

Similar hindi poem from Tragedy