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नमिता गुप्ता 'मनसी'

Abstract Romance

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नमिता गुप्ता 'मनसी'

Abstract Romance

अपनी-अपनी प्रतीक्षाओं में..

अपनी-अपनी प्रतीक्षाओं में..

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दिन भर के सारे दृश्यों से थक कर

चाहोगे जो कभी सोना

जरा सा ..

हां, ज़रा सा 

मैं रहूंगी वहीं 

उन्हीं उनींदी नींदो में ,

.. प्रतीक्षारत

सुबह के लिए !!


..और इस तरह

देखेंगे हम एक-दूसरे को

अपनी-अपनी प्रतीक्षाओं में !!



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