अपने शहर से...
अपने शहर से...
अपने शहर से अपने पैरों की मिट्टी तुम जरूर लाना
बाद मेरे जाने केइसे मेरी कबर पे ड़ाल जाना
यू बेवजह रूठ कर तुम तो चले गए,
जिंदगी की मेरे साँसे तुम साथ अपने ले गए,
खलिश ना रहती जो लौट आने का वादा इसबार भी कर जाते,
इंतजार छोड़ो अपनी यादों को ही मुझको लौटाकर जाते,
जिंदा नहीं अब लाश हूँ मैं
अभी एक नुमाइश हूँबाजार लगा हैं दर्द जरूर देखने आना
अपने शहर सेअपने पैरों की मिट्टी तुम जरूर लाना
बाद मेरे जाने केइसे मेरी कबर पे ड़ाल जाना
एक मुहब्बत उन पलों से थी जब तुम मिले,
एक नफरत उन पलों से जब तुम औरों के हूए,
किन लफ्जों का यकीन मानूँसारे तो तुम ही कह गए,
कभी मेरी हँसी के लिए सारी रात जागे तुम,
अब रातों को उठकर रोने के लिए छोड़ गए तुम,
अब नहीं सहा जातादिल का दर्द भी मेरे बाद आकर दफना देना
अपने शहर सेअपने पैरों की मिट्टी तुम जरूर लाना
बाद मेरे जाने केइसे मेरी कबर पे डाल जाना।
