अपना अपना गणतंत्र
अपना अपना गणतंत्र
कुछ साल पहले,
गाँव के एक सरकारी स्कूल में
बच्चों की एक झांकी देखी थी।
सामान्य से दिखने वाले
उन बच्चों के चेहरों पर
किसी उत्सव का उत्साह था ,
उस 26 जनवरी को।
सब अपने अपने हाथों का
तिरंगा एक दूसरे से ऊंचा
करने में लगे थे।
खुशी की बात ये थी कि
हर स्थिति में कद तिरंगा
का ही बढ़ रहा था ।
अब वो बच्चे बड़े हो गये हैं
और वो अब भी वहीं काम कर रहे हैं
पर तिरंंगे का रंग बंट चुका है
एक के हाथ में हरा झंडा है तो
दूसरे के हाथ में केसरिया!
और बीच की सादगी और सच्चाई
कहीं गौण हो चुकी है!
