बंटते-बंटते हम कितना बंट गए इंसानियत की राह में बिल्कुल सिमट गए। बंटते-बंटते हम कितना बंट गए इंसानियत की राह में बिल्कुल सिमट गए।
कलियुग ने सब की बुद्धि बिगारी। पंथन में बंट रहे हैं नर-नारी। कलियुग ने सब की बुद्धि बिगारी। पंथन में बंट रहे हैं नर-नारी।