गजानन
गजानन
घर-घर झूला डरे, गजानन।
घर-घर झूला डरे।
जब-जब भादौं महीना आवें।
तुम्हरों जनम सब मिलकर मनावें।
घर-घर में झांकी सजें।
गजानन-----
माता भवानी के तुम हों छैया।
शंकर सुवन स्वामी कार्तिक के भैया।
काम बनाओ बिगरे गजानन।
हरी-हरी दूबा देवा तुम खों चढ़ावें।
लड़ुवन को देवा भोग लगावें।
गजरन के ढ़ेर लगे गजानन।
बिगड़ी बना दो सबकी गजानन।
प्रथम पूज्य जग विघ्न विनाशक।
भक्तन शरण परे।
कवर दिया हुआ है
गजानन-----------
कलियुग ने सब की बुद्धि बिगारी।
पंथन में बंट रहे हैं नर-नारी।
कछु नहीं समझ परे।
गजानन------------
राम भक्ति के तुम हों दायक।
भक्त कल्पनय, जन प्रतिपालक।
कर जोरे हम सब खड़े।
गजानन---
सब मिल गायें आरती तुम्हारी।
हे गजवंदन संत हितकारी।
सब के काम सई।
गजानन-----
