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Amit Singhal "Aseemit"

Abstract Drama

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Amit Singhal "Aseemit"

Abstract Drama

अंत हीन रात की कालिमा

अंत हीन रात की कालिमा

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अंत हीन रात की कालिमा होती निर्जीव और एकांत।

एक गहरी सी ख़ामोशी और सब कुछ एक दम शांत।


इस रात की कालिमा में ही तो एक चांद निकलता है।

तारों की जगमगाहट के कारण से आकाश खिलता है।


इस सुस्त सी रात की कालिमा में सब थककर सोते हैं।

जो दिन में सोते, वे इस कालिमा में ख़्यालों में खोते हैं।


गृहणी, मज़दूर, कामगार सब इस रात को सोकर काटें।

कुछ जागकर काम करें, कोई कह कर सुख दुख बांटें।


रात की कालिमा शुभ संकेत होती एक नए उजाले की।

रात भर नींद की सुस्ती मिटाए ताज़ी चाय मसाले की।


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