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Chandra prabha Kumar

Romance

3  

Chandra prabha Kumar

Romance

अनकही भावना

अनकही भावना

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  कितनी पाती लिखी तुमको,

   पर भेज नहीं पायी,

   अपने दिल के भावों को,

   तुमसे कह नहीं पायी। 


        सोचा तुम हँसोगे ,

        झेल नहीं पाऊँगी,

        तुम किसी से कह दोगे,

        सह नहीं पाऊँगी। 


  प्रियतम मेरे भावों की, 

   यह पाती जब भी पाओगे,

   याद करोगे तब तो हम को,

   पर कुछ कह ना पाओगे ।


        दूर कहीं होंगे हम तुमसे,

        तब हमें नहीं तुम पाओगे,

        कोई तुम्हारा अपना था,

        यह तो तब जान पाओगे।


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