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Jyoti Sharma

Tragedy

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Jyoti Sharma

Tragedy

अनचाहा जीवन-अबार्शन

अनचाहा जीवन-अबार्शन

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मां तेरी नन्ही सी गुड़िया क्या ना तुझको प्यारी है

तू चाहे ना गले लगा पर वह तो तुझ पर वारी है


कैसे खुद से अलग करेगी मैं तेरा हिस्सा हूं मां

तुझको ना याद आऊंगी क्या दो पल का किस्सा हूं मां


मैं एक भारी बोझा हूं यह पापा मुझको कहते हैं

क्या ऐसे ही कुछ ख्याल तेरे मन में भी रहते हैं


अगर लोग मुझे ना समझ सकें तो ना यह उनकी गलती है

क्या तू बेटी को समझेगी जो तेरे उदर में पलती है


मैं जानती हूं तू बेबस है तो मैं तुझसे नाराज नहीं

दुनिया में आना भाग्य नहीं तो मुझे इसकी परवाह नहीं


अनचाहा एक जीवन हूं तू क्यों मुझको ढोती है

चल बस कर अब चुप हो जा क्यों तू इतना रोती है


जी भर के प्यार जता ले मां मैं तेरे मन में रह जाऊं

इससे पहले कि मर कर के टुकड़ों टुकड़ों में बह जाऊं


चल कर दे मुझको अलविदा और अपने आंसू पोंछ ले

हे ईश्वर मुझ पर दया कर फिर बेटी का ना जन्म दे



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