अमानत में खयानत
अमानत में खयानत
वो अमानत में खयानत कर रहे हैं,
वो साजिशों में शुमार हो रहे हैं,
वो जुर्म की जमानत कर रहे हैं,
वो पीठ पीछे वार कर रहे हैं।।
वो रिश्तों में भी सियासत कर रहे हैं,
आपसी व्यवहार असमान कर रहे हैं,
मतलब के मैदान से चुनाव लड़ रहे हैं,
सत्ता लोलुपता में ज़मीर गिरवी रखें हैं।।
छीना झपटी करके साहूकार बन रहे हैं,
उदार,हितैषी बन चुपके से हड़प रहे हैं,
गिरगिट की तरह रंग बदलते रहते हैं,
वो तो अमानत में खयानत कर रहे हैं।।
