STORYMIRROR

Amit Singhal "Aseemit"

Abstract Drama Inspirational

3  

Amit Singhal "Aseemit"

Abstract Drama Inspirational

अक्स

अक्स

1 min
136

कभी किसी का दिल न दुखाया हो।

कभी कोई पाप या गुनाह न किया हो।


न हो उस पर किसी का उधार या क़र्ज़।

निभाएं हों सारी ज़िम्मेदारियां और फ़र्ज़।


हमेशा सबका भला सोचता हो जो शख़्स।

हां, केवल वहीं देख पाता है अपना अक्स।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract