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Anil Jaswal

Tragedy

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Anil Jaswal

Tragedy

अज्ञातवास ये कैसा था सहोकार

अज्ञातवास ये कैसा था सहोकार

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एक दिन कोरोना आ धमका,

अच्छा चला चलाया जीवन,

किसी ओर राह पे आ अटका।


जहां सबकुछ बंद हो गया,

सरकार ने आपातकालीन परिस्थितियां देख,

एक ऐसी व्यवस्था बनाई,

पशु, पक्षी और प्रकृति को छोड़,

सबको अलग थलग करवा दिया,

इंसान बेचारा मन मसोस के रह गया।


सोशल डिस्टैंसींग को बना दिया आवश्यक,

मास्क लगाना बन गया सिद्धांत,

कहीं कोई इकट्ठे त्योहार नहीं मना सकते,

सामूहिक योगदान नहीं कर सकते,

बस अकेले ही रह सकते,

अगर वार्तालाप भी हो करना,

तो दो व्यक्तियों में दो गज का

फासला पड़ेगा रखना।


ऐसा दृश्य कभी नहीं आया इतिहास में,

जहां इंसान हो गया इतना मज़बूर,

उसको झुकना पड़ा एक वायरस के आगे,

चूर चूर हो गया,

उसका घमंड,

उसको न सुझे कोई हल।


ऐसा मालूम होने लगा,

जैसे मैं हूं एड़म,

परंतु हुआ देख विचलित,

नहीं थी मेरे साथ इव।


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