अजन्मा बच्चा
अजन्मा बच्चा
ज़मीन से फलक तक , कोई पासबाँ नहीं देखा।
इस माँ ने , मेरे बच्चे,दूजा फरिश्ता नहीं देखा।
राब्ता सिर्फ तुझे था, मेरे जिस्म के हर गोशे से,
जो मंज़र पेट के अंदर देखा तूने, क्यों वो बाहर नही देखा।
अभी तो लकीरें भी नही बनी थी तेरी हथेली पे
नाजायज़ कह दिया तूझे, फ़िर तेरा मुक़द्दर नही देखा।
लहू से बना तू , फिर पल में लहूलुहान हो गया
ज़माने ने मुहब्बत को, पाकीज़गी नज़र से नहीं देखा।
तड़पती रही ममता मेरी, दुनिया घमंड लिए रहा नीलोफ़र
जो आँसू आँखों में देखा, फिर किसी की पलकों पे नहीं देखा
