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Aishani Aishani

Tragedy

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Aishani Aishani

Tragedy

अजीब हूँ ना मैं..!

अजीब हूँ ना मैं..!

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कहते हैं वक़्त सबकुछ सीखा देता है

, सच है या झूठ...!

 नहीं पता,

 पर..

चले जा रहे हैं,

चले जा रहे हैं, 

 कभी तन्हाई में सुबक लेते हैं..,

तो कभी. .


उसके दिये जख़्म को कुरेद कर

ख़ुद ही हरा भरा कर देते हैं ,

आगे बढ़ने के वास्ते

हौसला मिलता है,

अजीब हूँ ना मैं..!

कोई हाथ नहीं थामता,

तो भी...

किसी को गिराती नहीं हूँ,

 ख़ुद आगे बढ़ने के लिए..!!


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