STORYMIRROR

Surendra kumar singh

Action

4  

Surendra kumar singh

Action

ऐसा क्यों

ऐसा क्यों

1 min
222

ऐसा क्यों होता है

अक्सर हमारे साथ कि

हम जिस बहस में शामिल होते हैं


उसमें हम खुद ही नहीं होते

बहस होती है

और उस पर तर्क होते हैं

होते ही रहते हैं


चलो अब तक जो हुआ ,हुआ

अब हम भी रहेंगें

अपनी बहसों में


अपने अपरिवर्तनीय शास्वत

विचारों के साथ

मनुष्य हैं तो अपनी

मनुष्यता के साथ

सचमुच अपने को नजरंदाज कर


बहस का हिस्सा बनना

सोये सोये बहस करने जैसा है

और हम जाग रहे हैं।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Action