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संजय असवाल "नूतन"

Romance

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संजय असवाल "नूतन"

Romance

अहसास

अहसास

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आज कल दिल कुछ खामोश सा रहने लगा है,

दिल व्यथित सा है, या कुछ अनकही

रिश्तों की डोर उलझ गई शायद,


या दिल दूर गगन की छांव में,

अपनी जमीन की तलाश में खोया रहता है,

जहां मिले उसे फुरसत के कुछ लम्हें


जो उसके अपने हो सिर्फ अपने,

जिन पर सवार होकर दिल,

चांद की दूधिया रोशनी में,

अपनी मखमली यादों के परों पर सवार हो,


बुने कुछ ताना बाना,

जो दिल के हर सरगम को छेड़ दे,

और दिल के कोने में फैली खामोशी की

चादर को हटा कर,

उनमें कुछ नया रंग सा भर दे,


और बिखेर दे कुछ जादुई सा,

कुछ फूलों की खुशबुओं से भरा महकता,

हरा भरा अहसास।


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