STORYMIRROR

Rajesh Kumar Shrivastava

Comedy Others

3  

Rajesh Kumar Shrivastava

Comedy Others

अध्यक्ष हो अपना !

अध्यक्ष हो अपना !

1 min
483

भाषण देनी हो तुम्हें या करनी हो कविता पाठ।

कार्यक्रम अध्यक्ष से, कर लो यारी गाँठ ।।


हाथ जोड़ प्रणाम कर, मंद-मंद मुस्काये ।

चंपी-झंपी भी करो, बीड़ा पान खिलाये ।।


शरणागत हो कहो, ‘भगवन’ मैं असहाय ।

एक तुम्ही अध्यक्ष जी अंतिम मोर सहाय ।।


आर्डर ले भाषण करो, मिलेगी पूरी छूट ।

श्रोता आयोजक भले चाहे जायें रुठ ।।


सारा टाइम आपका, शर्म करो ना भैया ।

 डर कैसा, जब कोतवाल भये हों सैंया ।।


स्वार्थ नीति है यही, सयानों का भी कहना।

डर कैसा आसंदी पर, जब अध्यक्ष हो अपना ।।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Comedy