STORYMIRROR

Vimla Jain

Abstract Action

4  

Vimla Jain

Abstract Action

अधूरा सपना

अधूरा सपना

1 min
214

क्या बताएं क्या हुआ

कल रात जब मैं सोई पड़ी थी

मुझे लगा आसमान में उड़ रही हूं

बहुत सुंदर बहुत सुंदर

बहुत ऊंची बहुत ऊंची

नीचे का नजारा बहुत ही सुंदर

आकाश में मजा आ रहा था

ऐसा लग रहा था

जैसे मैं कोई पक्षी हूं

आकाश दुनिया शहर को निकली हूं


अचानक देखती हूं एक बड़ा दरवाजा आया

उसके बाहर लोगों की बहुत भीड़ थी एक जना आगे आया

सुंदर दरवाजा बंद था

मैंने सब तरफ देखा,

फिर पूछा कि यह क्या है

वह बोला यह स्वर्ग का दरवाजा है

मगर अभी बंद है

क्योंकि बहुत लोग धरती से आ गए हैं

और इनके पास हिसाब नहीं है

तो जिसका नाम बोलें उसको अंदर जाना है

हम अपने बारी का इंतजार कर रहे हैं


मैं घबराई क्या क्या मैं मर गई हूं

मैंने नींद में ही अपने हाथ पांव संभाले

और जोर से चिल्लाई

एकदम आंख खुल गई

लगा अरे यह तो सपना था अधूरा सपना

जो कभी भी हो सकता है पूरा

इसीलिए ऐ बंदे कर्म कर तू अच्छे

तो मिले स्वर्ग के द्वार हमेशा खुले

कर्मों का खेल है न्यारा

जो जैसे कर्म करेगा

वैसा फल देगा भगवान यह बात मुझे समझ में आई।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract