STORYMIRROR

Dinesh Dubey

Abstract

4  

Dinesh Dubey

Abstract

अधूरा सफर

अधूरा सफर

1 min
10

जिंदगी के भाग दौड़ में,

कई सफर अधूरे रह जाते हैं,


सफर भी सपनों की तरह ही होते हैं,

जो अक्सर पूरे नहीं होते।


जीवन चक्र के पहिए में हम सब

ऐसा उलझ चुके हैं।


जब तक मिलता नहीं है मोक्ष,

ये सफर अधूरा ही रहता है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract