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Writer Rajni Sharma

Romance

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Writer Rajni Sharma

Romance

अधूरा पत्र

अधूरा पत्र

2 mins
383

आज भी मेरी डायरी में

वह पुराना खत

उन लम्हों को समेटे हुए है 

जो कभी तुम्हारे लिए लिखे थे मैंने 

उस खत में पड़ा वह सूखा गुलाब 

आज भी मेरे प्यार की खुशबू से तरोताज़ा है 


आज भी याद है मुझे

कॉलेज का वो पहला दिन 

जब कॉलेज की कैंटीन में तुम

पहली बार मुझसे टकराई थी 

समझ कर कोई आवारा 

तुमने मुझे कुछ बातें सुनाई थी 

पर उस वक्त मैं कुछ बोल ही ना पाया 

क्योंकि पहली बार सामने 

मेरे सपनों की परी जो आई थी 


कॉलेज का वो first lecture

मुझे सच में इतना भाया था 

क्योंकि अपने सपनों की रानी को 

मेरी ही क्लास में जो पाया था 

दिल में थी एक अलग खुशी

एक अलग-सा जुनून छाया था 


जब तुमने खुद को introduce करते हुए 

मेरे ही शहर का बताया था

बरसों से इस चाँद को 

ना जाने कहाँ छुपाया था 

मेरी ही क्लास में आज 

जिसको मैंने पाया था

 

हर रोज ही तुम कॉलेज में

बड़ी सिंपल बनकर आती थी

और तुम्हारी यह सादगी 

हर बार मुझे ठग जाती थी

जीन्स में भी तुम क्यूट थी लगती 

पर सूट में अलग ही कहर ढ़ा जाती थी


मुश्किल से ही दिन में कभी

हमारी मुलाकात हो पाती थी

मैं तुम्हें देख मुस्काता 

और तुम मुझे देख मुस्काती थी 

दिल दीवाना तुम्हारा हो गया था 

उस पहली ही नजर में 

पर बताया तो कहीं दोस्ती भी ना तोड़ दो 

कुछ कह ही ना पाया हमेशा इसी डर में 


अपने दिल के जज़्बातों को

एक पन्ने पर उतारा था

तुम्हारी हर मासूमियत को

अपने शब्दों से सँवारा था

मेरे दिल के दरिया का

तुम ही तो एक सहारा था 

कहीं खो ना दूँ अब उसको भी 

यही सोच कर इस खत को भी नकारा था 


कोई प्रेम पत्र नहीं मैंने

जज़्बात दिल के लिखे थे

चाहत थी तुम तब से ही मेरी

जब हम पहली बार मिले थे

भले चाहत पूरी ना हुई मेरी

इसका ना कोई अफसोस है

पर यह अधूरा पत्र जो कभी दे ना सका 

तुम्हारी याद दिलाता रोज है...।


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