STORYMIRROR

Arunima Thakur

Tragedy

4  

Arunima Thakur

Tragedy

अधूरा इश्क

अधूरा इश्क

1 min
402

अधूरा इश्क हम सब की अमानत है

बरसो से दिल के एक कोने में

छिपा हुआ किसी मीठी याद सा

इत्र सा महकाता है जीवन को

कठिन समय में फूल सा कोमल

स्पर्श बनकर सहलाता है मन को

क्योंकि अधूरा इश्क जो कभी

कोई भुला नही पाता,चाह कर

भी नही चाह पाता भुलाना

बस एक दर्द सा शामिल रहता है

मुस्कान में भी दिख जाता है

पर किसी को नज़र नही आता है

यह इश्क है ज़नाब यह मुक्कमल

हो जाये तो इश्क कहाँ रह जाता है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy