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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Fantasy Others

4.5  

संजय असवाल "नूतन"

Abstract Fantasy Others

अधूरा इश्क..!

अधूरा इश्क..!

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तेरे साथ बिताए वो लम्हें
आज भी सांसों में महकते हैं,
तेरी होंठों की वो हंसी
मेरे आंखों में चहकते हैं।

हाथों में जब हाथ था तेरा
दिल में उम्रभर का ख्वाब था,
कुछ कसमें थीं, कुछ वादे थे
और हर वादा बेहिसाब था।

कभी रूठना तेरा, मनाना मेरा
कभी बिना कहे सब समझ जाना,
फिर बाहों में सिमट एक दूजे के
दो धडकनों का एक हो जाना।

पर ये हो न सका इस किस्मत में
और तू मुझसे दूर हो गई,
देखते ही देखते इन आंखों से
जाने तू कहां खो गई।

आज तू बेशक दूर है मुझसे
मैं अब भी तेरी यादों में खोया हूं,
इन धडकनों का हिसाब नहीं
मैं तेरी यादों में कितना रोया हूं।

मै जानता हूं, तू बेवफा न थी
न मेरे इश्क का कोई हिसाब था,
बस इश्क की इस कहानी में
हम दोनों का थोड़ा ही साथ था।

कुछ रिश्ते मुकम्मल होकर भी
उम्रभर साथ कहां रहते हैं,
और कुछ अधूरे इश्क बिछड़कर
इस दिल में धड़कते रहते हैं।

हमारा इश्क भी कुछ ऐसा ही था
जो मिलते ही यूं जुदा हुआ,
खत्म हुआ नहीं ,ये अभी बस
एक अधूरा इश्क सा हुआ।


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