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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Romance Fantasy

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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Romance Fantasy

तुमसे ही तो प्यार है..

तुमसे ही तो प्यार है..

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कुछ शिकायतें हैं तुमसे
कुछ दिल में बात बाकी है,
तुमसे रूठ जाने की
मुझमें आदत बाकी है।

कभी तुम चुप रहते हो
तो हम भी बेचैन हो जाते हैं,
तुम्हारी उस खामोशी में हम
जाने कहाँ खो जाते हैं।

कभी छेड़ जाऊं तुम्हें तो मैं
तुम झूठा सा गुस्सा करना,
फिर आँखों ही आँखों में
चुपके से इज़हार करना।

मेरी शरारत पर यूँ तुम
नाराज़ मत हुआ करना,
प्यार है जानम तुझसे बेपनाह
कभी मेरी भी परवाह करना।

कभी तुम रूठ जाओ तो
हम तुम्हें दिल से मनाएँगे,
तेरी एक हँसी की खातिर
हम खुद ही बिछ जाएंगे।

कुछ पल तुम्हारे हों
कुछ ख्वाब पलकों में हमारे हों,
दुनियां चाहे जितनी दूर ले जाए हमें
दिल के रास्ते मगर मेरे लिए खुले हों।

मैं तुम्हारी आँखों में हमेशा
अपना एक जहाँ ढूँढता रहूँगा,
तुम मेरी धड़कनों में चुपके से
अपना नाम सुनती रहना।

हम बात न करें कभी
फिर भी दिलों में बातें होती रहें,
तुम पास न हो फिर भी
ख्वाबों में मुलाकात होती रहे।

चलो सारी शिकायतें आज
हम दोनों भूल जाते हैं,
कुछ पल बस एक दूजे में
खामोशी से खो जाते हैं।

न कोई सवाल हो तुमसे
न कोई जवाब हम से हो,
बस तुम मेरे पास रहो
और हाथों में हाथ तुम्हारे हो।

फिर यूँ ही उम्र गुजरती जाए
कभी हँसी में, कभी आँसू में,
कभी हमारी शरारतों में
कभी उन खामोश रातों में।

मुझे रब से कुछ नहीं चाहिए
बस हर जन्म में तुम्हारा साथ हो,
हर बार तुमसे ही प्यार हो
हर बार तुम से ही मुलाकात हो।


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