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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Fantasy Inspirational

5.0  

संजय असवाल "नूतन"

Abstract Fantasy Inspirational

तुम बहुत याद आते हो।..

तुम बहुत याद आते हो।..

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आज हम जो सुबह उठकर
बच्चों को आवाज लगाते हैं,
जल्दी करो देर हो रही
अद्ध नींद में उन्हें जगाते हैं।

आज जो हम बाँधते जूते के फीते
बैग में किताबें रखते हैं,
कभी डाँटते, कभी समझाते,
कभी प्यार से हँस देते हैं।

आज जो लगता है....!
जिम्मेदारियाँ ही भरी है जीवन में
रोज रोज की किट किट स्कूल उन्हें छोड़ना होता है,
कभी उनकी छोटी सी बात पर गुस्सा
कभी सारा काम अपना भूलना होता है।

पर एक दिन.....!

न कोई आवाज़ होगी
न कोई हाथ पकड़कर कहने वाला होगा,
आप मुझे स्कूल छोड़ोगे?
न किसी प्यारे से चेहरे का दरवाज़े पर यूं इंतज़ार होगा।

न कोई बैग पटककर कहेगा अपनी दिनभर की बातें
हमें ना कहने वाला होगा,
ना इधर उधर बिखरे जूते होंगे
ना लड़ झगड़ कर कोई रोने वाला होगा।

कमरा वही होगा पर उसमें
बच्चों की खिलखिलाहट नहीं होगी,
उधम, शोर शराबा, गपशप
कमरों में बस सूनी यादें होंगी।

और तब शायद......!
हम पुरानी तस्वीरों की गट्ठर खोलेंगे,
उन बीते हुए दिनों को याद कर
अपने बच्चों की शैतानियां टटोलेंगे।

किसी तस्वीर पर खुद हँसेंगे
किसी तस्वीर पर आँखें भर आएंगी ,
और दिल चुपके से बस यही कहेगा
“काश"… वो दिन क्या लौट आयेंगे।

तब समझ आएगा....!

जिसे हम आज जिम्मेदारी कहते थे
वो तो जिंदगी की हमारी नेमत थी,
जिसे हम रोज़ की भागदौड़ कहते
वही हमारी सबसे खूबसूरत दौलत थी।

जिन हाथों को पकड़कर हम रोज
सड़क पार करवाते थे,
उन्हीं नन्हे कदमों से हम
अपने कदम ताल मिलाते थे।

वही पल कल हमारी यादों के
सबसे खूबसूरत पन्नों में दर्ज होंगे,
आज बच्चे छोटे हैं बेशक
कल अपने आसमान के सिकंदर होंगे।

आज जो हमारी उँगली थामे हैं
कल अपनी मंजिलों के राहों पर होंगे,
बचपन को छोड़ आगे बढ़ते
वो एक नई दुनियां को गढ़ रहे होंगे।

इसलिए ऐ जिंदगी...!
आज की इस भागदौड़ को थोड़ा प्यार से जी लेने दे,
इन छोटी छोटी परेशानियों को दिल में
तस्वीर बनाकर रख लेने दे।

आज जो पल हमें थका रहे हैं,
कल वही पल हमें रुलाएँगे,
और फिर उन्हीं यादों के सहारे
हम जी भरकर मुस्कुराएँगे।

और तब शायद दिल बस इतना कहेगा... "काश"...!

वक्त एक बार फिर वहीं ठहर जाता
जहाँ सुबह की जल्दी थी,
बच्चों की शरारत अपनों की आवाज़ …
और जिंदगी इतनी खूबसूरत थी,
कि हमें उसकी खूबसूरती का तब एहसास ही नहीं था।


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