Bikramjit Sen
Drama
मरियम तैयार थी
बेटी कहाँ जा रही हो ?
इंतज़ार थोड़ा और इंतज़ार करो
धरती के इस स्वर्ग पर यूँ न निकला करो
अपने ख़ुशियों के लिए तुम थोड़ा और इंतज़ार करो
दादी ने कहा मरियम को
ठीक जैसे वो कहती थी उसकी माँ को
और उनकी माँ उनको
एक आवाज़
अपनाया
कर्म
मैने पाया है
फासले
मज़ाक
आत्म चिंतन
संदेह का बीज
अब मैं क्या क...
वो क्यों नहीं...
मुझे जैसी छोटी बच्ची को जो गम दिखी वो उन बड़े लोगों को क्यों न दिखी ! मुझे जैसी छोटी बच्ची को जो गम दिखी वो उन बड़े लोगों को क्यों न दिखी !
भगवान् था, शैतान था, हैवान था, ज़िंदा होकर भी...वो बेजान था। भगवान् था, शैतान था, हैवान था, ज़िंदा होकर भी...वो बेजान था।
कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं। कि चले जाओ वही जहाँ ये रूह-ए-एहसास, अब रहती नहीं।
फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ? फिर तुम्हीं कहो इसका भविष्य क्या होता ?
इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी। इसीलिए तो वह मेरी बेटी भी है और माँ भी।
माँ की कितनी बात सुनाऊँ, ममता की प्रतिमूर्ति ऐसी, देवी छोटी पड़ जाती है, धरती पे माँ कहलाती है। माँ की कितनी बात सुनाऊँ, ममता की प्रतिमूर्ति ऐसी, देवी छोटी पड़ जाती है, धरती प...
छंदमुक्त कविता...! छंदमुक्त कविता...!
किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा। किसी को प्रेम लिप्त करा दे, और परलोक भिजवा देता पैसा।
मैं शीतल हूँ और चंचल भी, माँ के दिल का चैन भी हूँ, मैं गर्ला हूँ और चपला भी, मैं क्रोधित जलते नैन... मैं शीतल हूँ और चंचल भी, माँ के दिल का चैन भी हूँ, मैं गर्ला हूँ और चपला भी, ...
और यही सोच रही है कि कितना कुछ पकाया मैंने इस आंच में। और यही सोच रही है कि कितना कुछ पकाया मैंने इस आंच में।
अपने दिल की हर एक बात मुझसे ही तो साझा करती है कहने को तो रिश्ता बस दोस्ती का है अपने दिल की हर एक बात मुझसे ही तो साझा करती है कहने को तो रिश्ता बस दोस्ती...
ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं देता। ना जाने क्या है जो मुझे जाने नहीं देता, एक एहसास है जो तुमसे दूर होने नहीं द...
यातनाएं सही तन और मन पर गहरी पीड़ा सही, यातनाएं सही तन और मन पर गहरी पीड़ा सही,
चाहे कितना घनघोर अँधेरा छाया है कर्मवीरों ने अमावस को पूनम बनाया है। चाहे कितना घनघोर अँधेरा छाया है कर्मवीरों ने अमावस को पूनम बनाया है।
सो कर उठने पर लगता है सपना है शायद सो कर उठने पर लगता है सपना है शायद
अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर ! अम्मा क्या गई, कुछ दिनों के वास्ते अपनी अम्मा के घर !
रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ रोचक शास्त्र मैं वर्तमान की वार्ता कहता हूँ
क्यूँकि वो नाजायज़ था क्यूँकि वो नाजायज़ था
बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्तेदारियां बड़ी भाती थी मुझे माँ और बच्चों की गतिविधियां जैसे मेरी जुड़ चुकी थी उनसे रिश्त...
इस माटी में लावण्य-लालित्य ललना के सिंदूर हैं, शोक-विलाप करती विधवाओं के क्रंदन भरपूर इस माटी में लावण्य-लालित्य ललना के सिंदूर हैं, शोक-विलाप करती विधवाओं के क्रं...