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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

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अधिवक्ता संजीव रामपाल मिश्रा

Tragedy

अच्छी नहीं प्यार में. .

अच्छी नहीं प्यार में. .

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अर्थी उठेगी जिस दिन हमारी,

गम-ए-आंख भर उठेंगी तुम्हारी।

गुजारिशें दुआ बन जायेंगी हमारी,

दर्द-ए-रात तन्हा बन जायेगी तुम्हारी।

हंसने की तबीब न रहेगी होंठो पर,

चलना होगा टूटी यादों के शीशों पर,

खुद तड़प उठोगे आईना देख कर,

अच्छी नहीं प्यार में रुखसतें शर्तों पर।



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