अभिमान
अभिमान
छोड़ो झूठे दम्भ तुम,
करो नहीं अभिमान।
माया के बंधन यहीं,
रह जायेगी शान।
रह जायेगी शान,
सभी सामान तुम्हारे।
मिट्टी की ये गात,
मोह मिट्टी से सारे।
प्रभु की कर लो भक्ति,
उसी से नाता जोड़ो।
हो जाये कल्याण,
दम्भ माया को छोड़ो।
