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अभिषेक कुमार 'अभि'

Inspirational

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अभिषेक कुमार 'अभि'

Inspirational

अभी शाम बाकी है

अभी शाम बाकी है

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अभी शाम का पहर बाकी है।

अभी तो दूर समंदर के पीछे,

सूरज की बाकी आभा झलक

ही रही है।

अभी भी रात आई नहीं।

अभी भी चाँद के संग सितारों

की सेना का,

आक्रमण बाकी है

अभी भी शाम बाकी है।


मुझे कुछ नजर आ रहा है।

ऊँचे-ऊँचे ढेलों की चट्टानों के पीछे,

स्याह गुफा के गर्भ से,

रौशनी की किरणें फूट रही हैं।

शायद एक मशाल बाकी है।

मंज़िल वहीं है, मैंने झाँकी है

अभी भी शाम बाकी है।


तो क्या हुआ जो मुझे उन्हें लाँघ,

उजाले से अपनी प्यास बुझानी है?

अभी मेरे पैरों में जान,

साँसों में गर्मी और

लहू में रवानी बाकी है।

हाँ! अभी मुझ में थोड़ी सी

जवानी बाकी है

अभी भी शाम बाकी है।


मुझे पुरखों को दिया वचन

याद आ रहा है।

ईश्वर के जीवन-दान का मान,

और माँ की नजरों में

उम्मीद की झलक याद आ रही है।

मैं कैसे थम जाऊँ?

अभी मेरी आँखों में पानी बाकी है

अभी भी शाम बाकी है।


अपने सीने में बस एक बार,

सांसों को भरने भर की देर है।

गिर जरूर गया हूँ, संभल जाऊँगा

मंज़िल को हासिल कर ही,

अगला दम लूँगा।

बस हिम्मत का काम बाकी है

अभी भी शाम बाकी है।




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