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Vijay Kanaujiya

Romance

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Vijay Kanaujiya

Romance

अब न ऐसी प्रीति लिखूंगा

अब न ऐसी प्रीति लिखूंगा

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नहीं लिखूंगा गीत प्रेम के

न ही तुमको मीत लिखूंगा

विरह वेदना से पीड़ित मैं

अब न मैं मनमीत लिखूंगा।


तुम ही हो मेरी यादों में

तुम ही हो मेरी बातों में

लगता है न दिल तेरे बिन

अब न ऐसी प्रीति लिखूंगा।


तेरी वो पायल की छमछम

जो मन को झंकृत करती थी

मेरा मन उनसे भी रूठा

अब न मैं झनकार लिखूंगा।


तेरी चाहत में आँखें जब

बारिश बन भीगा करती थीं

ऐसी यादों के सावन की

अब न मैं बरसात लिखूंगा।


तेरी आहट से अधरों पर

मुस्कानें विखरा करती थीं

ये भी अब हैं तुमसे रूठी

अब न मैं मुस्कान लिखूंगा।


उलझ गए जज़्बात भी मेरे

हालातों के मंजर से

अब न है कोई अभिलाषा

न ही अब जज़्बात लिखूंगा।


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