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अब दर्द नहीं होता

अब दर्द नहीं होता

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कभी एक शख़्सीयत की याद में 

रात डसती थी नागिन सी 

दिन बंजारे लगते थे..!


बातें करती भूूरी चमकती 

नीलम सी नीली आँखें उसकी

घुंघराले काले बाल 

तपती रेत सा रंग सुनहरा 

सुगंध संदली जिस्म की उसकी 

याद आते ही 

काल के अंतराल को चीरती हुई

ग़म की परछाईं लिपट जाती थी..!


पर अब जब

याद आती है उसकी बातें तो

तलसाट नहीं जगता 

न मिलने की आस पलती है

यादों के बवंडर उठने पर..!


न जागता है अब कोई 

रंज या पश्चाताप

उसके छोड़कर जाने पर

जैसे 

ना पतझड़ सा महसूस होता है

किसी मौसम के बीत जाने पर..!


दर्द नहीं होता आँखें नहीं छलकती

एक असीम शांति का व्याप्त

मन में उतरता है

जैसे बादलों के छंटने पर

धुला हुआ आसमान लगता है..!


कब तक कोई किसी पत्थर

दिल की याद में तड़पते 

ज़िंदा लाश बने जीता रहता 

आख़िर 

हम भी रखते है दिल, 

हम भी इंसान है..!


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