आवाज़ बुलंद करें...!!!
आवाज़ बुलंद करें...!!!
यहाँ आरामदायक कुर्सियों पर बैठे
तथाकथित "बड़े लोग"...
अख़बारों में छपे देश की
विकास-पतन की खबरों पर
अपनी समालोचना प्रकट करते हुए
'एअर-कंडिशन' की
अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस
वो तथाकथित "बड़े लोग" ...
ज़मीन पर पैर जमाते-जमाते,
गिरते-फिसलते-संभलते हुए
हमेशा जद्दो़ज़हद करते
जीते-मरते साधारण लोगों पर
क्यों अपने 'ओहदे ' एवं 'अहंकार' की
ग़ैर ज़िम्मेदाराना नुमाइश करते हुए
यूँ उन्मत्त नज़र आते हैं...?
उनके कमरों में 'एअर कंडिशन',
कार्यालयों के विशेष कक्षों में 'एअर कंडिशन' और 'उनके निजी वाहनों में 'एअर कंडिशन'...
क्यों एक तरफऐसी राजसी ठांठ-बांट
और दूसरी तरफ मरूस्थल की वीरानगी...?
जीवन की ऐसी दयनीय अंतर्द्वंद्व क्यों ?
क्यों उन आरामदायक कुर्सियों पर बैठे
तथाकथित "बड़े लोग" अक्सर
सीधे सादे-भोले भाले लोगों पर
'जानबूझकर' ज़ुल्म ढाया करते हैं ?
जब इस ब्रह्मांड में
'इतना सही' तालमेल नज़र आता है,
फिर हम इंसानों के दरमियाँ
इतने बनावटी 'फासले' क्यों...???
क्यों इस दुनिया में
दौलत-ओ-रुतबे के बलबूते पर
ऐसा भेदभावपूर्ण व्यवहार...???
इसलिए ओ सीधे सादे-भोले भाले इंसान !
अपने आत्मशक्ति की
निरंतर वृद्धि करें
एवं स्वयं को
सशक्त-समर्थ-सबल बनाएँ...!
अपनी आवाज़ बुलंद करें...!!!
