आज़ादी -- सही मायनों में...
आज़ादी -- सही मायनों में...
जब ये अत्याधुनिक समाज
दकियानूसी भरी दलीलों से
मुक्त होकर...
हमारे आसपास
भीड़ जमाए हुए
बेगैरत, बेईमान, बेलगाम लोगों की
जंजाल से मुक्त होकर...
सिर्फ अपना उल्लू
सीधा करने की फ़िराक में
इधर की बात उधर और
उधर की बात इधर करनेवाले
कपटी लोगों से मुक्त होकर...
चमचागीरी एवं खुशामदी भरे स्वभाववाले दोमुंहे विश्वासघाती लोगों से
मुक्त होकर...
एक नई उम्मीद भरी सुबह से
रूबरू हो पाएगा,
तभी हमारा दब्बू-ग़ुलाम मन
इस लंबी गर्दिश से पूरी तरह
आज़ाद हो पाएगा,
वरना...
सब खेल-तमाशा...
धोखा ! धोखा !
