राष्ट्र प्रथम...!!!
राष्ट्र प्रथम...!!!
अगर इस राष्ट्र की अवधारणा को
बुलंद करना है,
तो निश्चित रूप में
हमें अपने सर्वोत्कृष्ट योगक्षेम पर
भरोसा करना पड़ेगा,
और हमारे आसपास की
नकारात्मक तत्वों की
बेवजह दखलंदाज़ी
खत्म करनी पड़ेगी
और राष्ट्रनिर्माण के
स्वर्णिम स्वप्नों के मद्देनज़र
हमें एकजुट होकर
हमारे कानों में
बेफिजूल अकर्मण्यता भरी
निरर्थक वार्तालाप एवं
राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर
शिकंजा कसने की
सख़्त ज़रूरत है,
नहीं तो हमारा मन
सही मायनों में
निर्णय नहीं ले पाएगा
और हम
ऐसी अवस्था में स्वयं को
भारत माता पूजन में
समर्पित कर पाने में
अक्षम महसूस करेंगे
और उसके दुष्परिणामस्वरूप
हमारे कदम डगमगा जाएंगे।
और ऐसी परिस्थिति
हमारे राष्ट्र की गरिमा पर
गहरी चोट पहुंचा सकती है !
अतः सावधान हो जाएं
एवं अपने आसपास
सकारात्मक सोचवाले
ईमानदार लोगों की
पहचान करें !!!
राष्ट्रविरोधी एवं सद्भावना विरोधी
गुटों पर अपनी
वैचारिक आंदोलन का
आगाज़ करें !!!
आइए, हम सब
एक संकल्प लें
कि अपने मन को
कभी स्वार्थी एवं
खुदग़र्ज़ नहीं बनने देंगे !
