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Ritu Garg

Romance

3  

Ritu Garg

Romance

आवाज़ ना दो

आवाज़ ना दो

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200

मुझ को मुझ तक रहने दो 

अपने में ही खो जाने दो

आवाज ना दो कहीं से भी तुम

आज मुझे ही रहने दो

प्यार ना हो जब तक तुम को

मुझको तुम आवाज ना दो

मेरी सूनी राहों में 

आज मुझे तुम चलने दो

मेरे तन और मन को तुम

आज अकेले चलने दो

उलझी हुई कुछ पहेलियों को

आज तुम सुलझने दो

बिखरे हुए तिनकों को तुम

आज मुझे तुम चुनने दो

अनजानी राहों पर चल कर

आज मुझे कदम भरने दो

उत्साहित मेरे मन को

तुम चकनाचूर ना करो

आज मुझे तुम चलने दो

मेरे अंतर्मन की बातों को

मन ही मन में करने दो

मेरी सुनी आंखों में

कुछ सपने तुम भरने दो

कुछ दूर तो चलने दो।



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