STORYMIRROR

Premdas Vasu Surekha 'सद्कवि'

Drama Inspirational

3  

Premdas Vasu Surekha 'सद्कवि'

Drama Inspirational

आटा दाल भाव

आटा दाल भाव

1 min
170

जब दो जून की रोटी का

संकट बड़ा ही भारी था

फिर युद्ध हुआ तब आपस में

यह बहरूपिये का शासन था

आपस में फिर भी ऐसे लड़ते

जैसे हो जन्मो के जानी दुश्मन

फिर क्या था मेरे दोस्तों

मानवता हो गई नग्न

लोग हो गई मग्न

सरोकार हो गए हनन

जीवन हो गया नयन

और नेताओं का चयन



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Drama