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Sunil Kumar

Romance Others

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Sunil Kumar

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आशियाना

आशियाना

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न जाने किसकी नजर लगी

मेरे आशियाने को

दर्द के सिवा कुछ भी न बचा 

अब पास मेरे लुट जाने को।


अक्सर खुला रखता हूं

अपने गरीबखाने को 

शायद कोई लूट ले जाए 

मेरे दर्द के खजाने को।


कभी इन आंखों ने भी

देखे थे हसीं ख्वाब

इस दिल में भी थे‌ 

कुछ अरमान।

 

पर वक्त की आंधी ने 

सलामत कुछ भी न छोड़ा

एक-एक कर मेरे सपनों को तोड़ा।

 

अब इस दिल में न कोई प्यास है

न ही बाकी कोई आस है

अब खुश रहता हूं मैं 

अपने आशियाने में 

व्यस्त रहता हूं 

जिंदगी के ग़म भुलाने में।



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