आन्दोलन
आन्दोलन
किया आन्दोलन बन किसान,
कर गये तिरंगे का अपमान !
गणतंत्र के पावन दिवस पर,
ले लिया गणतंत्र की जान !
कितनी खुशियां थी जन मन में,
जोश भरा था हर कण-कण में।
राष्ट्र ध्वज का किया अपमान,
कैसे कहूं अब इन्हें किसान।
खेतों में चलते हल देखे थे,
देखा धूप में तपता किसान।
कभी नहीं देखा था मैंने,
बनते किसानों को शैतान।
आज देख लिया जगत ने,
देशद्रोही स्वघोषित किसान।
