STORYMIRROR

Deepshikha Nathawat

Abstract Crime Children

4  

Deepshikha Nathawat

Abstract Crime Children

आंचल

आंचल

1 min
415

उस आंचल का अहसास अभी मुझमें बाकी है

माँ की गोद का वो शुकुन भरा पल मेरे लिए काफी है


आंचल में समेट लेती थी हमेशा मुझे वो माँ मेरी

थक जाती हूँ जब हार कर याद बहुत आती माँ है तेरी


तू नहीं है साथ मेरे तो जिंदगी कुछ कुछ अधूरी है

ये सच है तेरे होने से ही माँ मेरी जिंदगी पूरी है.. 


क्या बताऊँ आजकल नींद नहीं आती है माँ मुझे रात में

माँ तेरे आंचल की महक समायी है मेरे हर जज्बात में।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract