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Deepshikha Nathawat

Abstract Crime Children

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Deepshikha Nathawat

Abstract Crime Children

आंचल

आंचल

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उस आंचल का अहसास अभी मुझमें बाकी है

माँ की गोद का वो शुकुन भरा पल मेरे लिए काफी है


आंचल में समेट लेती थी हमेशा मुझे वो माँ मेरी

थक जाती हूँ जब हार कर याद बहुत आती माँ है तेरी


तू नहीं है साथ मेरे तो जिंदगी कुछ कुछ अधूरी है

ये सच है तेरे होने से ही माँ मेरी जिंदगी पूरी है.. 


क्या बताऊँ आजकल नींद नहीं आती है माँ मुझे रात में

माँ तेरे आंचल की महक समायी है मेरे हर जज्बात में।


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