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Deepshikha Nathawat

Abstract Romance

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Deepshikha Nathawat

Abstract Romance

प्रेम व्यथा

प्रेम व्यथा

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इस अप्रैल की चुभती धूप में

तुम्हारा प्रेम ही मुझे छांव देता है 


तेरे होने का मुझे आभास देता है

क्या तुझ तक नहीं पहुंची मेरी पीर ? 


मेरे होने का भी तुझे अहसास देता है

ये प्रेम की व्यथा नहीं तो और क्या है


तू बहुत दूर है पर हमेशा मेरे पास रहता है।


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